Wednesday, April 13, 2022

ऐसा वृक्ष जिसकी छाया में बैठने से दिल के रोग दूर हो जाते है!

●●●●अर्जुन की छाल से रोगों का उपचार●●●●

अर्जुन की छाल के प्रयोग और मेरे कुछ अनुभूत प्रयोग

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■ हृदय के रोग■
अर्जुन की मोटी छाल का महीन चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में मलाई रहित एक कप दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करते रहने से हृदय के समस्त रोगों में लाभ मिलता है, हृदय की बढ़ी हुई धड़कन सामान्य होती है।अर्जुन की छाल के चूर्ण को चाय के साथ उबालकर ले सकते हैं। चाय बनाते समय एक चम्मच इस चूर्ण को डाल दें। इससे भी समान रूप से लाभ होगा।

अर्जुन की छाल के चूर्ण के प्रयोग से उच्च रक्तचाप भी अपने‌ आप सामान्य हो जाता है। यदि केवल अर्जुन की छाल का चूर्ण डालकर ही चाय बनायें, उसमें चायपत्ती न डालें तो यह और भी प्रभावी होगा, इसके लिए पानी में चाय के स्थान पर अर्जुन की छाल का चूर्ण डालकर उबालें, फिर उसमें दूध व चीनी आवश्यकतानुसार मिलाकर पियें।

 •हलवा•
अर्जुन की छाल तथा गुड़ को दूध में औटाकर रोगी को पिलाने से दिल में आई शिथिलता और सूजन में लाभ मिलता है।हृदय की सामान्य धड़कन जब 72 से बढ़कर 150 से ऊपर रहने लगे तो एक गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन करने से शीघ्र ही धड़कन सामान्य हो जाती है।गेहूं का आटा 20 ग्राम लेकर 30 ग्राम गाय के घी में भून लें जब यह गुलाबी हो जाये तो अर्जुन की छाल का चूर्ण तीन ग्राम और मिश्री 40 ग्राम तथा खौलता हुआ पानी 100 ग्राम डालकर पकायें, जब हलुवा तैयार हो जाये तब सुबह सेवन करें। इसका नित्य सेवन करने से हृदय की पीड़ा, घबराहट, धड़कन बढ़ जाना आदि शिकायतें दूर हो जाती हैं।

•घृत•
गेहूं और इसकी छाल को बकरी के दूध और गाय के घी में पकाकर इसमें मिश्री और शहद मिलाकर चटाने से तेज हृदय रोग मिटता है।अर्जुन की छाल का रस 50 ग्राम, यदि गीली छाल न मिले तो 50 पानी ग्राम सूखी छाल लेकर 4 किलोग्राम में पकावें। जब चौथाई शेष रह जाये तो काढ़े को छान लें, फिर 50 ग्राम गाय के घी को कढ़ाई में छोड़े, फिर इसमें अर्जुन की छाल की लुगदी 50 ग्राम और पकाया हुआ रस तथा दूध को मिलाकर धीमी आंच पर पका लें। घी मात्र शेष रह जाने पर ठंडाकर छान लें। अब इसमें 50 ग्राम शहद और 75 ग्राम मिश्री मिलाकर कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में रखें। इस घी को 6 ग्राम सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें।

यह घी हृदय को बलवान बनाता है तथा इसके रोगों को दूर करता है। हृदय की शिथिलता, तेज धड़कन, सूजन या हृदय बढ़ जाने आदि तमाम हृदय रोगों में अत्यंत प्रभावकारी योग है। हार्ट अटैक हो चुकने पर 40 मिलीलीटर अर्जुन की छाल का दूध के साथ बना काढ़ा सुबह तथा रात दोनों समय सेवन करें। इससे दिल की तेज धड़कन, हृदय में पीड़ा, घबराहट होना आदि रोग दूर होते हैं।

हृदय रोगों में अर्जुन की छाल का कपड़े से छाने चूर्ण का प्रभाव इन्जेक्शन से भी अधिक होता है। जीभ पर रखकर चूसते ही रोग कम होने लगता है। हृदय की अधिक धड़कनें और नाड़ी की गति बहुत कमजोर हो जाने पर इसको रोगी की जीभ पर रखने मात्र से नाड़ी में तुरन्त शक्ति प्रतीत होने लगती है। इस दवा का लाभ स्थायी होता है और यह दवा किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाती है।

अर्जुन की छाल का चूर्ण 10 ग्राम को 500 ग्राम दूध में उबालकर खोया बना लें। उस खोये के वजन के बराबर मिसरी का चूरा मिलाकर, प्रतिदिन 10 ग्राम खोया खाकर दूध पीने से हृदय की तेज धड़कन सामान्य होती है। अर्जुन की छाल 500 ग्राम को कूट-पीसकर उसमें 125 ग्राम छोटी इलायची 20 ग्राम को मिलाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम पानी के साथ सेवन करने से तेज दिल की धड़कन और घबराहट नष्ट होती है।अर्जुन की छाल को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर चूर्ण बनाएं। इस चूर्ण को किसी कपड़े द्वारा छानकर रखें। प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण गाय का घी और मिश्री मिलाकर सेवन करने से हृदय की निर्बलता दूर होती है। अर्जुन की छाल 10 ग्राम, गुड़ 10 ग्राम तथा मुलेठी 10 ग्राम। तीनों को एक साथ लगभग 250 ग्राम दूध में उबालकर सेवन करें।

●हड्डी टूटने पर●

अर्जुन के पेड़ के पाउडर की फंकी लेकर दूध पीने से टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है। चूर्ण को पानी के साथ पीसकर लेप करने से भी दर्द में आराम मिलता है। प्लास्टर चढ़ा हो तो अर्जुन की छाल का महीन चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार एक कप दूध के साथ कुछ हफ्ते तक सेवन करने से हड्डी मजबूत होती है। टूटी हड्डी के स्थान पर भी इसकी छाल को घी में पीसकर लेप करें और पट्टी बांधकर रखें, इससे भी हड्डी शीघ्र जुड़ जाती है।

*मेरा अनुभूत योग *
लाक्षादि गुगल 2 गोली
अर्जुन छाल चूर्ण 2 ग्राम 
मीठी सुरंजान 2 ग्राम 
बंसलोचन 1 ग्राम 
मृगश्रृंग भस्म 500 मिलीग्राम 
यह एक मात्रा है । टूटी हड्डी जोड़ने के लिए। तुरंत दर्द कम हो जाता है । 
डाँ०अमनदीप०सिंह०चीमाँ,दसुआ०पंजाब

●जलने पर●
आग से जलने पर उत्पन्न घाव पर अर्जुन की छाल के चूर्ण को लगाने से घाव जल्द ही भर जाता है।

●खूनी प्रदर●
इसकी छाल का 1 चम्मच चूर्ण, 1 कप दूध में उबालकर पकाएं, आधा शेष रहने पर थोड़ी मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करें, इसे दिन में 3 बार लें।

*मेरा अनुभूत नुस्खा*
अर्जुन ,सतावर ,अशोक छाल, नागकेशर , स्वर्ण गैरिक, मुलहठी 50-50 ग्राम का बना चूर्ण 1 चम्मच ताजे जल से लेने से कही से भी निकलने वाला रक्त बंद हो जाता है । 
डाँ०अमनदीप०सिंह०चीमाँ,दसुआ०पंजाब

●शारीरिक दुर्गंध को दूर करने के लिए●
अर्जुन और जामुन के सूखे पत्तों का चूर्ण उबटन की तरह लगाकर कुछ समय बाद नहाने से अधिक पसीना आने के कारण उत्पन्न शारीरिक दुर्गंध दूर होगी।

●मुंह के छाले●
अर्जुन की छाल के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर छालों पर लगायें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

●पेशाब में धातु का आना●
अर्जुन की छाल को कूटकर 2 कप पानी के साथ उबालें, जब आधा कप पानी शेष बचे, तो उसे छानकर रोगी को पिलायें। इसके 2-3 बार के प्रयोग के बाद पेशाब खुलकर होने लगेगा तथा पेशाब के साथ धातु का आना बंद हो जाता है। अर्जुन की छाल का 40 मिलीलीटर काढ़ा बनाकर पिलाना चाहिए।

●ताकत को बढ़ाने के लिए●
अर्जुन बलकारक है तथा अपने लवण-खनिजों के कारण हृदय की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है। दूध तथा गुड़, चीनी आदि के साथ जो अर्जुन की छाल का पाउडर नियमित रूप से लेता है, उसे हृदय रोग, जीर्ण ज्वर, रक्त-पित्त कभी नहीं सताते और वह चिरंजीवी होता है।

●श्वेतप्रदर●
महिलाओं में होने वाले श्वेतप्रदर तथा पेशाब की जलन को रोकना भी इसके विशेष गुणों में है।

●पुरानी खांसी●
छाती में जलन, पुरानी खांसी आदि को रोकने में यह सक्षम है।

●हार्ट फेल●
हार्ट फेल और हृदयशूल में अर्जुन की 3 से 6 ग्राम छाल दूध में उबालकर लें।

*मेरा अनुभूत योग*
ह्रदयोग चिंतामणी रस 15 ग्राम 
ह्रदयार्णव रस 15 ग्राम 
अर्जुन छाल 60 ग्राम 
रगड़कर 60 पुडिया बनाकर सुबह शाम अर्जुनारिष्ट से एक-एक पुड़ी लें । हार्ट फेल में लाभदायक है। डाँ०अमनदीप०सिंह०चीमाँ,दसुआ०पंजाब󞐼󞐼?

●तेज धड़कन, दर्द, घबराहट●
अर्जुन की पिसी छाल 2 चम्मच, 1 गिलास दूध, 2 गिलास पानी मिलाकर इतना उबालें कि केवल दूध ही बचे, पानी सारा जल जाये। इसमें दो चम्मच चीनी मिलाकर छानकर नित्य एक बार हृदय रोगी को पिलायें। हृदय सम्बंधी रोगों में लाभ होगा। शरीर ताकतवर होगा।

●पेट दर्द●
आधा चम्मच अर्जुन की छाल, जरा-सी भुनी-पिसी हींग और स्वादानुसार नमक मिलाकर सुबह-शाम गर्म पानी के साथ फंकी लेने से पेट के दर्द, गुर्दे का दर्द और पेट की जलन में लाभ होता है।

●पीलिया●
आधा चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण जरा-सा घी में मिलाकर रोजाना सुबह और शाम लेना चाहिए।

● मुखपाक (मुंह के छाले)●
अर्जुन की जड़ के चूर्ण में मीठा तेल मिलाकर गर्म पानी से कुल्ले करने से मुखपाक मिटता है।

●कान का दर्द●
अर्जुन के पत्तों का 3-4 बूंद रस कान में डालने से कान का दर्द मिटता है।

●मुंह की झांइयां●
इसकी छाल पीसकर, शहद मिलाकर लेप करने से मुंह की झाइयां मिटती हैं।

●टी.बी. की खांसी●
अर्जुन की छाल के चूर्ण में वासा के पत्तों के रस को 7 उबाल देकर दो-तीन ग्राम की मात्रा में शहद, मिश्री या गाय के घी के साथ चटायें। इससे टी.बी. की खांसी जिसमें कफ में खून आता हो ठीक हो जाता है।

●खूनी दस्त●
अर्जुन की छाल का महीन चूर्ण 5 ग्राम, गाय के 250 ग्राम दूध में डालकर इसी में लगभग आधा पाव पानी डालकर हल्की आंच पर पकायें। जब दूध मात्र शेष रह जाये तब उतारकर उसमें 10 ग्राम मिश्री या शक्कर मिलाकर नित्य सुबह पीने से हृदय सम्बंधी सभी रोग दूर हो जाते हैं। यह विशेषत: वातदोष के कारण हुए हृदय रोग में लाभकारी है।

●रक्तप्रदर (खूनी प्रदर)●
अर्जुन की छाल का एक चम्मच चूर्ण एक कप दूध में उबालकर पकायें, आधा शेष रहने पर थोड़ी मात्रा में मिश्री के साथ दिन में 3 बार स्त्री को सेवन करायें।

●प्रमेह (वीर्य विकार) में●
अर्जुन की छाल, नीम की छाल, आमलकी छाल, हल्दी तथा नीलकमल को समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर चूर्ण करें। इस चूर्ण की 20 ग्राम मात्रा को 400 मिलीलीटर पानी में पकायें, जब यह 100 मिलीलीटर शेष बचे, तो इसे शहद के साथ मिलाकर नित्य सुबह-शाम सेवन करने से पित्तज प्रमेह नष्ट हो जाता है।

●शुक्रमेह●
शुक्रमेह के रोगी को अर्जुन की छाल या श्वेत चंदन का काढ़ा नियमित सुबह-शाम पिलाने से लाभ पहुंचता है।

●बादी के रोग●
अर्जुन की जड़ की छाल का चूर्ण और गंगेरन की जड़ की छाल को बराबर मात्रा में लेकर उसका बारीक चूर्ण तैयार करें। चूर्ण को दो-दो ग्राम की मात्रा में चूर्ण नियमित सुबह-शाम फंकी देकर ऊपर से दूध पिलाने से बादी के रोग मिटते हैं।

●खूनीपित्त (रक्तपित्त)●
अर्जुन की 2 चम्मच छाल को रातभर पानी में भिगोकर रखें, सुबह उसको मसल छानकर या उसको उबालकर उसका काढ़ा पीने से रक्तपित्त में लाभ होता है।रक्तपित्त या खून की उल्टी में अर्जुन के तने की छाल के बारीक चूर्ण की 10 ग्राम मात्रा को दूध में पकाकर खाने से आराम आता है। इससे रक्त की वाहिनियों में रक्त जमने लगता है तथा बाहर नहीं निकलता है।

●कुष्ठ (कोढ)●
रक्तदोष एवं कुष्ठ रोग में इसकी छाल का 1 चम्मच चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से एवं इसकी छाल को पानी में घिसकर त्वचा पर लेप करने से कुष्ठ में लाभ होता है।अर्जुन की छाल को पानी में उबालकर गुनगुने पानी में मिलाकर नहाने से बहुत लाभ होता है।

● बुखार●
अर्जुन की छाल का 40 मिलीलीटर क्वाथ (काढ़ा) पिलाने से बुखार छूटता है।

●व्रण (घाव) के लिए●
अर्जुन छाल को यवकूट कर काढ़ा बनाकर घावों और जख्मों को धोने से लाभ होता है।अर्जुन के जड़ के चूर्ण की फंकी एक चम्मच दूध के साथ देने से चोट या रगड़ लगने से जो नील पड़ जाता है, वह ठीक हो जाता है।घाव में अर्जुन छाल 5 ग्राम से 10 ग्राम सुबह शाम दूध में पकाकर खायें। छाल को पीसकर घाव पर बांधने से भी अच्छा लाभ होता है। सूखा पाउडर 1 से 3 ग्राम खाना चाहिए

●जीर्ण ज्वर (पुराना बुखार)●
अर्जुन की छाल के एक चम्मच चूर्ण की गुड़ के साथ फंकी लेने से जीर्ण ज्वर मिटता है।

●अर्जुन छाल क्षीरपाक विधि●
अर्जुन की ताजा छाल को छाया में सूखाकर चूर्ण बनाकर रख लें। इसे 250 ग्राम दूध में 250 ग्राम (बराबर वजन) पानी मिलाकर हल्की आंच पर रख दें और उसमें उपरोक्त तीन ग्राम (एक चाय का चम्मच हल्का भरा) अर्जुन छाल का चूर्ण मिलाकर उबालें। जब उबलते-उबलते पानी सूखकर दूध मात्र अर्थात् आधा रह जाये तब उतार लें। पीने योग्य होने पर छानकर रोगी द्वारा पीने से सम्पूर्ण हृदय रोग नष्ट होते है और हार्ट अटैक से बचाव होता है।

●दमा या श्वास रोग●
अर्जुन की छाल कूटकर चूर्ण बना लेते हैं। रात को दूध और चावल की खीर बना लेते हैं। सुबह 4 बजे उस खीर में 10 ग्राम अर्जुन का चूर्ण मिलाकर खिलाना चाहिए। इससे श्वांस रोग नष्ट हो जाता है।

●उरस्तोय रोग (फेफड़ों में पानी भर जाना)●
अर्जुन वृक्ष का चूर्ण, यष्टिमूल तथा लकड़ी को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में 100 से 250 मिलीमीटर दूध के साथ दिन में 2 बार देने से उरस्तोय रोग (फेफड़ों में पानी भर जाना) में लाभ होता है।

●अतिक्षुधा (अधिक भूख लगना) रोग●
रोगशालपर्णी और अर्जुन की जड़ को बराबर मात्रा में मिश्रण बनाकर पीने से भस्मक रोग मिट जाता है।

●मल बंद (उदावर्त, कब्ज)●
मूत्रवेग को रोकने से पैदा हुए उदावर्त्त को मिटाने के लिए इसकी छाल का 40 मिलीलीटर काढ़ा नियमित रूप से सुबह-शाम पिलाना चाहिए।

●हड्डी के टूटने पर●
हड्डी के टूटने पर अर्जुन की छाल पीसकर लेप करने एवं 5 ग्राम से 10 ग्राम खीर पाक विधि से दूध में पकाकर सुबह शाम खाने से लाभ होता है। मात्रा : सूखा पाउडर 1 ग्राम से 3 ग्राम खाना है।

●मधुमेह का रोग●
अर्जुन के पेड़ की छाल, कदम्ब की छाल और जामुन की छाल तथा अजवाइन बराबर मात्रा में लेकर जौकूट (मोटा-मोटा पीसना) करें। इसमें से 24 ग्राम जौकूट लेकर, आधा लीटर पानी के साथ आग पर रखकर काढ़ा बना लें। थोड़ा शेष रह जाने पर इसे उतारे और ठंडा होने पर छानकर पीयें। सुबह-शाम 3-4 सप्ताह इसके लगातार प्रयोग से मधुमेह में लाभ होगा।

●मोटापा दूर करें●
अर्जुन का चूर्ण 2 ग्राम को अग्निमथ (अरनी) के बने काढ़े के साथ मिलाकर पीने से मोटापे में लाभ होता हैं।

●पेट के कीड़ों के लिए●
अर्जुन के फूल, बायविंडग, जलपीपल, मोम, चंदन, राल, खस, कूठ और भिलावा को बराबर मात्रा में लेकर धूनी देने से मच्छर और कीड़े मर जाते हैं।अर्जुन के फल, भिलावा, लाख, श्रीकस, श्वेत, अपराजिता, बायविंडग और गूगल आदि को बराबर मात्रा में पीसकर रख लें, फिर इसे आग में डालकर धूनी देने से घर में छुपे सांप, चूहे, डांस, घुन, मच्छर और खटमल निकलकर भाग जाते हैं।

●पैत्तिक हृदय की बीमारी में●
3 से 6 ग्राम अर्जुन की छाल का चूर्ण व 3 से 6 ग्राम गुड़, 50 मिलीलीटर पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।

●हिस्टीरिया●
अर्जुन वृक्ष की छाल, चौलाई की जड़, काले तिल और तीसी का लुआब 25-25 ग्राम की मात्रा में लें तथा 30 ग्राम की मात्रा में मिश्री लें। इसके बाद इन सबको घोंट लें और अर्जुन के पत्ते के रस के साथ कूट करके छाया में सुखायें। इसका बारीक चूर्ण बनाकर शीशी में भरकर रख लें। अर्जुन के पत्ते के रस के साथ इस औषधि को 4-6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम को खिलाने से हिस्टीरिया रोग ठीक हो जाता है।

●शरीर में सूजन●
इसकी छाल का बारीक चूर्ण लगभग 5 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा में क्षीर पाक विधि से (दूध में पकाकर) खिलाने से हृदय मजबूत होता है और इससे पैदा होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।लगभग 1 से 3 ग्राम की मात्रा में अर्जुन की छाल का सूखा हुआ चूर्ण खिलाने से भी सूजन खत्म हो जाती है।गुर्दों पर इसका प्रभाव मूत्रल अर्थात अधिक मूत्र लाने वाला है। हृदय रोगों के अतिरिक्त शरीर के विभिन्न अंगों में पानी पड़ जाने और शरीर पर सूजन आ जाने पर भी अर्जुन की छाल के बारीक चूर्ण का प्रयोग किया जाता है।।

आपका अपना
डाँ०अमनदीप०सिंह०चीमा
संस्थापक कोहिनूर आयुर्वेद https://youtu.be/BfYDgpjzP3w 
Whatsapp 9915136138

Tuesday, March 15, 2022

“बादशाह कोहिनूर महायोग” से ताकत के बादशाह कैसे बनें ?

आपका ध्यान किधर है , ताकत का बादशाह इधर है।‌

जी हां , आपने वो कहावत तो सुनी होगी शेर कभी घास नही खाता , मास खाता है। 

“बादशाही कोहिनूर महायोग”

कृप्या माताएं , बहने इस पोस्ट से दूर रहे, यह पोस्ट सिर्फ पुरुषों के लिए लिखी गई है। 

वैसे ही एक कहावत मेरी भी सुनलो 
मर्द ‌कभी वयाग्रा नही खाता , आयुर्वेदा के शाही योग खाता है । 
उन्ही शाही महायोगों के खजाने से आज आपको बताने जा रहा हूं‌ , अपना अनुभूत महायोग , जो कि आपके अंदर ताकत का तूफान भर देगा , आपके अंग अंग में । बार - बार करके भी आप थकेंगे नही ।‌ बहुत से लोग कहते है कि दवा कितना भी महंगा हो , रिजल्ट चाहिए , मेरे क्लिनिक के सबसे मशहूर पिछले 14-15 साल से जिन्होंने पूरे विश्व में तूफान मचाकर , कमजोर दिलों में जौश भर दिया , आज वो लोग अपनी सुखी विवाहित जीवन जी रहे , जिनके नाम है तूफानी ताकत महायोग, जीवन जौश महायोग , महासतंभन महायोग ) 3-4 पेशेंट ऐसे थे , जिन्हें इन दवाओं से भी बढकर मेरे इस “बादशाही कोहिनूर महायोग” ने अच्छा रिजल्ट दिया है।  जिन्होंने अपने ही हाथों बचपन की गलतियां नादानियां की वजह से , ऊपर से गलत दवाओं के सेवन से अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली , उन्हे तुफानी ताकत महायोग से ताकत वर योग “बादशाही कोहिनूर महायोग”लगा , जिन पर तूफानी ताकत महायोग, फेल हो जाए, उन मरीजों पर इस योग का बहुत ही जबरदस्त रिजल्ट मिला ।‌ यह महंगा भी बहुत है। तूफानी ताकत से 5 गुना ज्यादा असरदार है , 5 गुना ज्यादा दवा इस नुस्खे में डाला जाता है, 5 गुना ज्यादा मेहनत करके बनाया जाता है , 5 गुना ज्यादा पैसा खर्च आता है।  यह ऐसा योग है । अगर इसका सेवन पूरे 3 महीना बिना हस्तमैथुन , बीवी से परहेज करके कर लिया जाए तो पुरुष अत्यंत वीर्यवान बनकर कामदेव के समान हो जाएगा । चेहरा तेज से भर जाएगा , आंखों का नूर बढ़ेगा, चुस्ती , फुर्ती , चाल , डाल मस्त हो जाएगी।  पूरी इमानदारी से 90 दिन परहेज करके दवा खायगा तो‌ यह सब इच्छाएं पूरी होगी । जो 90 दिन दवा खाकर भी संभोग न करेंगा , इस नुस्खे की ताकत संभाल सकेगा । इस दवा में इतनी ताकत है कि संभोग का इतना सबर , परहेज कोई ही कर सकता है ‌। अगर पूरे 45 दिन पूरे परहेज के साथ इसका सेवन कर लिया जाए और 90 दिन खा लिया जाए तो हिजड़ा भी संभोग के काबिल हो सकता है। लोग गाड़ी, बंगला सबपर पैसा खर्च करते है, शादी में लाखों खर्च कर देते है , नशे में लाखों बर्बाद करते है , कुछ भी करते है लेकिन सेहत पर ध्यान नही देते, अगर अपनी जिंदगी राजाओं जैसी ताकत , अपना परिवार खुशियों जैसा देखना चाहते तो “बादशाही कोहिनूर महायोग” का सेवन कर सकते है। 
हर वर्ष आप “बादशाही कोहिनूर महायोग” 20 दिन इस्तेमाल करेंगे तो पूरा एक साल संभोग की ताकत बनी रहती है । “ बादशाही कोहिनूर महायोग” बुजुर्ग भी ले सकते है। जो शौकीन है वो भी ले सकते है। जो लोग जिम के शौकीन है , प्लेयर है , प्लेब्वाय है ले सकते है ‌। जो लोग “बादशाही कोहिनूर महायोग” के सेवन काल में अल्कोहल या कोई नशा लेंगे उनको मैं “बादशाही कोहिनूर महायोग” खाने की सलाह नही देता । जो लोग “बादशाही कोहिनूर महायोग” 5-7 दिन खाकर , कंट्रोल से बाहर होकर तलाशने लगे उनको भी मैं इसकी सलाह नही देता । अगर पैसा खर्च करके “बादशाही कोहिनूर महायोग” का पूरा रिजल्ट लेना है , ऊपर बताएं अनुसार परहेज रखना जरूरी है। मंगवाने के लिए आप मेरे दिए वटसऐप नंबर पर संपर्क कर सकते हैं , पोस्ट शेयर करना चाहो तो कर सकते है। नूस्खा सिर्फ दवा खरीदने वाले को ही बताया जाएगा । लेकिन इतना बता देता हूं कि “बादशाही कोहिनूर महायोग” में 50  जड़ी बूटियों, कुशतों का मिश्रण है। कुछ ऐसे भी घटक है जिनके नाम बहुत कम वैद्य लोगों ने सुने होंगे । कभी समय मिला तो “बादशाही कोहिनूर महायोग” का नुस्खा जरुर शेयर करुगा , बनाने का तरीका बिल्कुल पूर्ण तरीके से बताया जाएं तो दो - तीन घंटे पोस्ट लिखने में ही लग जाएगें ।‌
कोरियर / पोस्ट से भारत / विदेश में आप मेरे बैंक अकाउंट, phonepe , Google pay adwance भेजकर‌ अपना पता , जीभ ( बिना ब्रश किए सुबह )  नाखुन ,चेहरा साफ फोटो भेजें । आपकी समस्या कबसे , कितनी ,उम्र , काम , वजन , हाईट , वेज या नान वेज है। सब लिखकर मेरे वटसऐप पर भेजे। “बादशाही कोहिनूर महायोग" लिख कर बात करें।‌ गुमराह करने वालों से बचें , यह योग केवल हम ही बनाते है। कीमत 45000 एक माह का है। 
एक साथ तीन महीने का लेने पर स्पैशल छूट मिलेगी। 
मेरे क्लिनिक पर आने से 15 दिन पहले appointment लें। 
Appointment पहले से बुक होती है , अपने मरीजों के लिए मैं जल्दबाजी नही करता , बातचीत के लिए खुला समय देता हूं। इसलिए adwance booking करवाएं। घर बैठे भी आप फोन पर बात करके दवा दिए हुए पते पर मंगवा सकते है । ज्यादा जानकारी के लिए वटसऐप पर संपर्क कर सकते है। समय लेकर ही फ़ोन करें। 

चलता हुं .....
सदैव आपका अपना शुभचिंतक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमाँ
कोहिनूर आयुर्वेदा 
Near Reet Farm , Hoshiarpur Road, Dasuya
144205 , Punjab , Bharat 
Mobile number 9915136138
https://wa.me/919915136138

Monday, March 7, 2022

मोटापा कैसे खत्म करें? इलाज , कारण क्या होते है ?

::::::::::::::::अब मोटापे की खैर नहीं:::::::::::::

मोटापा कारण , नुकसान , परहेज , इलाज कैसे होगा ? आओ जानते है :- 

कारण ? 
कोई काम न करना , समय पर खाना न खाना , खाने के बीच गैप न करना , पानी कम पीना , ज्यादा खाना , फ्री बैठना , आरामदायक जीवन , दिन में सोते रहना , तैल , घी , तली चीजें , मैदा , चीनी , चाय , फास्ट फूड , पैकट बंद चीजें , सोफ्ट-कोलड ड्रिंक, बेकरी की चीजें खाने से मोटापा बढ़ता है। इन चीजों का परहेज रखें। 

मोटापा से कोनसे रोग पैदा होते है ? 
डायबिटीज़ , हार्ट प्रोब्लम , हाई बी.पी , डिप्रेशन , सास चढ़ना, आस्टिओआर्थराईटिस, थकान , एनीमिया , फैटी लीवर 

कुछ घरेलू नुस्खे:-

त्रिफला चूरन शहद से चाटें जा

पिप्पलामूल शहद से चाटें।

नागरमोथा शहद के साथ चाटें ।
कैलेस्टरोल में भी यह बहुत लाभकारी है।

नीम्बू का रस , दो चम्मच शहद सुबह खाली पेट गर्म पानी में मिलाकर लें। 

http://drascheema.blogspot.in

1. सुबह उठते ही यदि आप चाय पीने के आदी हैं
तो दूध की चाय के बजाय ग्रीन टी पिएं। इसमें
एंटी ऑक्सिडेंट होते हैं, जो दिल के लिए
फायदेमंद हैं। यह वजन कम करने में भी मदद करती है।
दिन में तीन-चार बार ग्रीन टी ले सकते हैं।

2. गेहूं के आटे की चपाती के बजाय जौ-चने के आटे
की चपाती फिट रहने और सेहत के लिए वरदान है।

3. सुबह उठकर नीबू-पानी लेना चाहिए। इससे
बॉडी का डिटॉक्सिफिकेशन होता है इसमें आप
शहद भी मिला सकते हैं।

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4. वजन घटाने के लिए डीप फ्राई और तेल से बने
खाने की मात्रा कम कर दें जितना संभव हो,
भाप में पका खाना ही खांए।

5. टमाटर और पुदीने की पत्ती युक्त सलाद खाने
से शरीर में वसा की मात्रा कम होती है।

6. खूब पानी पीकर मोटापे पर आसानी से
नियंत्रण पाया जा सकता है या फिर आप
गुनगुना पानी पी सकते हैं इससे पाचन तंत्र ठीक
प्रकार से काम करता है और शरीर में मौजूद
अतिरिक्त चर्बी कम होती है।

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7. फाइबर की अधिक मात्रा वाले मौसमी जूस
खाएं इसे वजन कम होता है। इनमें आप संतरा,
मौसमी, नीबू और आंवला, सेब, बेरी जैसे फल-
सब्जियां ले सकते हैं।

8. ड्राई फ्रूट्स के सेवन से भी वज़न ठीक रहता है।
बादाम, अखरोट और सूखे मेवों में होता है
ओमेगा थ्री फैटी एसिड। जिससे वजन रहता है
काबू में।

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9. सुबह एक टमाटर खाने से कॉलेस्ट्रोल का लेवल
ठीक रहता है और शरीर में मौजूद वसा भी कम
होती है।

10. भरवां पराठे की बजाय भरवां रोटी खाएं।
इससे एक्स्ट्रा फैट से बचेंगे और सब्जियां भी पेट में
जाएगी।

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11. कैलोरी रहित
गोभी की सब्जी़ या उसका सूप लें, वजन घटाने
में बहुत मदद मिलेगी।

12. जंकफूड बिल्कुल न लें और बाहर के खासकर तले
हुए खाने को न खाएं, ये वजन बढ़ाने में मददगार हैं।

13. खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पीएं
बल्कि आधे से एक घंटे का अंतराल जरूर रखें।

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14. सुबह का नाश्ता हैवी करें और दोपहर में कम
कैलोरी और रात में बहुत हलका भोजन करें।

15. खाना चबा-चबा कर धीरे-धीरे खाएं, इससे
आपको कम भूख लगेगी। इन सब उपायों के साथ
ही आपको अपनी जीवनशैली में भी सकारात्मक
बदलाव लाने होंगे। आपको आहार के साथ-साथ
अपना व्यवहार भी दुरुस्त रखना होगा।

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आपको चाहिए कि आप नियमित व्यायाम करें।

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🌾मोटापे के लिए मेरी आयुर्वेदिक अनूभूत दवा🌾

👉मोटापे से प्रेशान रोगी मोटापानाशक दवाऔ का इस्तेमाल करें ।

 कई_रोगों_का_जन्मदाता_मोटापा

👉अरोग्यावर्धनी वटी - 2 -2 गोली सुबह शाम ताजे पानी से ।
👉मेदोहर विडंगादि लौह -2-2 गोली सुबह- शाम पानी से ।
👉त्रिमूर्ती रस 1-1 गोली सुबह-शाम पानी से ।
👉त्रिफला चूर्ण 5-5 ग्राम सुबह- शाम ।
👉अर्क गोमूत्र , अर्क जीरा .अर्क चिरायता ,अर्क गिलोय,अर्क अजवायन पाँचों को 500-500 मिलीलीटर मिलाकर रख लें ।

50-50 ग्राम बराबर पानी में मिलाकर ।
खाने के १ घण्टे बाद लें | 

सारी दवा एक साथ ही लेनी है ।

मोटापे में बहुत आशुकारी दवा है । 
इससे अच्छी दवा मेरी नजर में आयुर्वेद में कोई नही ।

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👉हजारों दवाएं खा -खा कर हार चुके निराश रोगियों के लिए वरदान ।

कोरियर द्वारा दवा मंगवा सकते हैं।

सदैव आपका अपना 
डाँ.ए.एस.चीमाँ
WhatsApp 9915136138
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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱

Monday, January 10, 2022

अस्थमा , दमा , श्वास रोग

•दमा ,अस्थमा ,जमी हुई कफ‌,बलगम को निकालने के लिए नुस्खा•

पंसारी से 100 ग्राम सुहागा खरीदकर लाएं ।‌इसे मुसबर भी बोला जाता है । अंग्रेजी में इसे बोरैक्स भी बोला जाता है ।‌ आयुर्वेद में “टंकण भस्म” इसी से तैयार किया जाता है ।‌

इसे आप खुले मुंह की लोहे के बर्तन पर रखकर फूला बनाकर पीसकर रख लें ।‌
पहली बार जब आप नीचे आग जलाकर बर्तन पर रखेंगे तो इसका पानी बनेगा , फिर कुछ ही देर में देखते ही देखते पानी सूख जाएगा । इसको ठंडा होने पर अच्छी तरह बारीक करके दुबारा बर्तन में डालें , यह फूलकर  काफी मात्रा में बन जाएगा । आप इसे पीसकर साफ डिब्बी में डालकर रख दें । अगर न बना सको तो बना बनाया खरीद लें ।  “वैद्यनाथ टंकण भस्म” ,“व्यास मुलहठी चूर्ण”  , “वैद्यनाथ मकरध्वज या रस सिंदूर”  खरीद लें। 

प्रयोग करने का तरीका :- 
सुहागा का बनाया हुआ पाउडर 30 ग्राम 
मुलहेठी का 30 ग्राम चूर्ण ,
मकरध्वज 2.5ग्राम 3 घंटे घुटाई करके चमकरहत किया हुआ,
अभ्रक भस्म 100 पुट्टी 2.5 ग्राम 

सभी को अच्छी तरह मिलाकर 30 पुड़िया बना लें । सुबह,शाम 
शहद से चाटकर गरम पानी या गर्म दूध लें । 

अगर रोज एक “स्वर्ण वर्क” भी दवा में मिला लिया जाए या तिल के दाने जितनी “स्वर्ण भस्म” मिला ली जाए तो रिजल्ट बहुत तेजी से मिलते हैं । 

वैसे मूल नुस्खे में टंकण और मुलहेठी ही है । आयुर्वेद के किसी -2 ग्रंथ में ही यह नुस्खा मिलता है । जोकि “सुधायष्टी चूर्ण, सुधायष्टी योग” नाम से मिलता है । मैंने अपने अनुभव अनुसार जिन दमा रोगियों को मकरध्वज और अभ्रक भस्म मिलाकर सेवन करवाया , उन्हे बहुत तेजी से रिजल्ट मिला। 

जिन्हें केवल जमी कफ की शिकायत है वह मुलहठी और टंकण सिर्फ दोनों को मिलाकर ही प्रयोग करें । दमा वाले रोगी मकरध्वज , अभ्रक भस्म मिला लें। 

मेरे पास एक दमें का बहुत पुराना रोगी आया जो बहुत कमजोर था , थोड़ा सा चलकर ही बैठ जाया करता था , सांस फूल जाता था । 
मैंने उसे इस दमा वाले मिश्रण में स्वर्ण भस्म मिलाकर दे दी । 
रोगी को पहली पुड़िया खाने के बाद शरीर में ताकत महसूस हुई, दो दिन बाद शरीर में चलने फिरने की ताकत लौट आई ,कुछ ही दिन दवा लेने के बाद काफी चलने के बाद भी नामातर ही सांस फूलता था । 15 दिन की दवा से घर के काम करने लग गया।  दो महीने चिकित्सा के बाद रोगी की दवा बंद कर दी , अब रोगी बिल्कुल ठीक है । 

अपनी सूझबूझ अनुसार यह नुस्खा तैयार करके प्रयोग करें । उससे पहले अच्छे आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह जरूर लें ।‌

सदैव आपका अपना 
डाँ० अमनदीप सिंह चीमाँ, पंजाब
कोहिनूर आयुर्वेद
Whatsapp 9915136138

मेरा नाम हटाकर कापी पेस्ट न किया जाए।

Monday, November 29, 2021

बेसन का हलवा , नजला जुकाम के लिए

सैंकड़ों लोगों ने आजमाया , आपने क्यो नही !!

नजला जुकाम और मेरा अनुभूत प्रयोग :- 
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बहुत ही डाँ की दवा खा-खाकर निराश रोगी मेरा यह अनूभूत  घरेलु प्रयोग जरूर करें । सैकड़ो रोगियों को ठीक करने का अनुभव प्राप्त किया है । कई वर्षो से लोगों को बताता रहा हुँ , बहुत ही गजब का कमाल का चमत्कारी नुस्खा है ।

यह जुकाम को ठीक करता ही है ,साथ में दिमाग की शक्ति को भी बढ़ाता है और शरीर को ताकत बखसता है । आँखों की रोशनी में भी लाभ देगा । 

यहाँ जो उपचार दे रहा हुँ आप प्रयोग करके लाभ लें औरों को भी बताएं ।

सामग्री :- 50 ग्राम देशी घी गाय का 
100 ग्राम बेसन 
20 ग्राम खसखस 
5 काली मिर्च 
20 ग्राम छिलका उतारे बादाम 
20 ग्राम गिरी अखरोट 
चीनी स्वादानुसार 

विधि :- सबसे पहले घी को कडाही में गर्म करें फिर उसमें बेसन को भूनें जब वह खुशबू देने लगे तो उसमें खसखस काली मिर्च बादाम अखरोट डाल दें फिर चीनी डाल कर पानी डालकर हलवा जैसा बन जाएं उतार लें ।

सेवन विधि :- रात को कोई खाने की चीज न लें । सिर्फ यही हलवा खाना है ।हलवा खाकर कोई तरल पदार्थ नही लेना जैसे दूध पानी जूस आदि ।
बस खाकर हवा बंद कमरे में कंबल लेकर सो जाए ।
अगली सुबह फर्क आपको दिखेगा । 
सिर्फ तीन दिन ही करें । सभी लोगों को भी मेरे इस अनमोल योग के बारे में बताएं ।

Sinusitis :-नाक में रोगन बादाम हमदर्द कंपनी का भी डालें या वैद्यनाथ का षड़बिंदूं तैल नाक मे डालें + वृहत लक्षमीविलास रस १-१ गोली धूतपापेशवर कंपनी की  सुबह शाम लें । साईनस  रोगियो के लिए। 

 जुकाम में एलोपेथ दवा लेकर जुकाम को सुखाना नही चाहिए । उसके नतीजे बहुत खतरनाक निकलते है । यह मैंने अपनी 14-15साल की खोज में पाया है कि ऐलोपैथी दवा  से सिर में जुखाम सूखने से ऐसा हो जाता है कि कई लोगों के बाल सफेद होने लगते है । कई लोगों की नजर कमजोर हो जाती है ,कई लोगों को कम सुनना ।कुछ को दमा , कई लोगों को दिमागी कमजोरी आदि ।
उन लोगों की सेहत की चिंता करते हुए मैं यह सरल और आसान नुस्खा दे रहा हुँ , कृप्या मेरी कदर और शुक्रीया अदा चाहे न सही ,अपनी सेहत और भविष्य का ख्याल रखते हुए यह नुस्खा जरूर प्रयोग करना और करवाना । हम लोग जल्दी ठीक होने के चक्कर में अपना भविष्य खतरे में डाल लेते है । तो साथियों घबराएं नही , आयुर्वेद है तो समाधान तो ही है , जब है समाधान तो फिर क्यो होते हो परेशान । आपके अच्छे ,सुखी , स्वस्थ जीवन की कामना के साथ , विदा लेता हुँ.....

सदैव आपका अपना शुभचिन्तक
डाँ०अमनदीप सिंह चीमाँ,पंजाब
Whatsapp & calling 9915136138

#नजला #जुकाम #बेसन #हलवा #देशी #आयुर्वेदिक #घरेलु

Friday, February 12, 2021

बाहुबली महायोग

*ताकत के बादशाह * भाग -7

* पतले लोगों के लिए योग *

जिसका नाम है “बाहुबली महायोग”

घटक :-
आमलकी रसायन ( आमला को 100 बार ताजा आमले के रस में सुखाकर बनाया चूर्ण 1kg ,
मुलेठी चूर्ण 1kg ,
ईशबगोल भुसी 250 ग्राम ,
सतावर चूर्ण 1kg ,
असगंध चूर्ण 1kg,
विदारी कंद चूर्ण 1kg,
गिलोय सत्व 500gm,
प्रवाल पिष्टी 200 ग्राम ,
मोती पिष्टी 100 ग्राम ,
लौह भस्म 100पुट्टी 100 ग्राम ,
अभ्रक भस्म 100पुट्टी 100 ग्राम,
चांदी भस्म 50 ग्राम
स्वर्ण भस्म 15 ग्राम
मिश्री 6 किलो

सब को मिलाकर रख लें। सुबह शाम दूध‌ से यह दवा लेनी होती है।

3 महीने के प्रयोग से चेहरा , धसी हुई आंखें, पिचके गाल बाहर आ जाएंगे। नया खून पैदा होगा । गर्मी सर्दी दोनों मौस्म में आप ले सकते है। बाजुओं में , टांगों में भरपूर जान भर देता है। सोना , चांदी , मोती के कारण योग महंगा बनता है। लेकिन एक महीने में शरीर में भरपूर जौश पैदा होने लगता है। हर साल मैं यह योग बहुत मात्रा में तैयार करता हुं। जिम वाले‌ लड़के , दुबले-पतले लड़के इसका इस्तेमाल करके लाभ उठाते है। अगर आप को इसकी जरूरत है तो आप कोरियर द्वारा मेरे से मंगवा सकते है।‌

सदैव आपका अपना
डाँ०अमनदीप सिंह चीमाँ, पंजाब
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Wednesday, October 28, 2020

ताकत के बादशाह ( मेरे अनुभूत महायोग ) भाग-1

Special Honeymoon Course

“ हनीमून महायोग ”

“ मिले न फूल तो काटों से दोस्ती कर ली ”

बहुत समय से मेरे पाठको की मांग थी कि आप हनीमून कोर्स तैयार कैसे करते है। इसे लिखित रूप में पाठकों के लिए पोस्ट करें। समय के अभाव के कारण इस योग को लिखने में समय निकलता गया , मेरा यह योग देश-विदेश में नये शादीशुदा लड़के या जिनकी शादी होने वाली होती है वो काफी पसंद करते है। जिन्होने इसका प्रयोग कर लिया वो अपने दोस्तों को भी इसका प्रयोग करने की सलाह जरूर देते है। यह योग केवल मर्द ही नही लड़कियों के लिए भी उतना ही फायदेमंद है।
यह योग सिर्फ 40दिन का है। जिनके पास समय का अभाव होता है , रिज्लट बहुत जल्दी चाहिए होते है , शादी की तारीख नजदीक होती है या नई शादी हुई होती है , हनीमून जाने का विचार कर रहे होते है , उनके लिए ही मैं इस योग का निर्माण करता हुं। इस योग को बनाने में काफी मेहनत और सावधानी की जरूरत होती है। जिसके कारण यह योग काफी महंगा भी पढ़ता है , लेकिन लाखों रूपए शादी पर खर्च करके अगर खूबसूरत जिंदगी के लिए , अपने जीवन साथी के लिए थोड़ा पैसे और खर्च कर लिए जाए तो खुशियों में चार चांद लगने से कोई नही रोक सकता ।‌

इस योग के फायदे बहुत है जो निम्नलिखित है :-
शादी से घबराहट होना , औरत के नाम से ही डरना ,
शरीर को संभोग में असमर्थ समझना ,
वीर्य में पतलापन होना , संभोग में समय न लगना ,
एक बार करने के बाद दूसरी बार इच्छा ही न होना।

सदैव आपका अपना
लेखक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमाँ , पंजाब
वटस ऐप 9915136138

इस योग के सेवन से काम उत्तेजना बहुत बढ़ जाती है , किंग कोबरा जैसी फुर्ती आ जाती है। मर्द औरत कामदेव के सामान हो जाते है। संभोगानंद बहुत बढ़ जाता है। इंद्री की मुरझाई हुई नशों में ताकत का तूफान दोड़ने लग जाता है , बार -२ संभोग करने को दिल करता है , लिंग का आकार और मोटापन बढ़ जाता है । संभोग में लंबा समय रूकावट बनती है जिससे आपके जीवन साथी को पूर्ण संतुष्टी मिलती है । इस महायोग के सेवन से नामर्द मर्द कहलाने लायक बन जाता है , आखिर में यही कहुंगा कि हिजड़ा भी संभोग के काबिल हो जाता है। जिनके जीवन साथी को अच्छे दमदार सैक्स पावर वाले जीवन साथी की जरूरत हो उसे एक बार जरूर इस “हनीमून महायोग” का सेवन करना चाहिए। इस “हनीमून महायोग” का सेवन करके हर गृह्स्थी अपने जीवन में खुशियाँ ला सकते है। हर मौस्म में इसका सेवन कर सकते है। हनीमून जाने से दस दिन पहले इसका सेवन शुरू कर दें। बार-बार मैदान में कूदने को मन करेंगा , मन नही भरेगा ।

अब नुस्खा देखें :-
हिंगुल 5-5 ग्राम के 10 पीस लेकर एक मिट्टी के बर्तन में डालें।
इसे चूल्हे पर चड़ाकर , ऊपर किसी बर्तन को लटकाकर
उसमें पाँच लीटर देशी नींबू का रस डालकर नीचे छोटा सा सुराख कर दें, ताकि रस बूंद बूंद टपकता रहे । नीचे‌ आग जलाए। इसमें आग का ही सारा खेल है‌, आग कम या ज्यादा , कब कैसे देनी है , बिना अनुभव के मुशकिल है। जो आयुर्वेद के चिकित्सक है , खुद रसायन योग दवाएं तैयार करते है, वो लोग ही बनाएं। अनजान कोशिश न करें। क्योंकि “नीम हकीम खतरा ए जान” वाला मुहावरा सिद्ध हो जाएगा। नीचे आग जलती रहे , ऊपर से रस टपकता रहे , जब नींबू का रस खत्म हो जाए। फिर सफेद प्याज के पाँच लीटर रस को टपकाकर खुशक कर दें। फिर आर्दक का रस पाँच लीटर टपका कर सुखा दें ।

उसके बाद जायफल , लौंग , जावित्री 50-50 ग्राम का पाउडर बनाकर ,  उसी बर्तन में आधा पाऊडर यानि 75 ग्राम नीचे फिर पांच ग्राम की एक उपरोक्त हिंगुल डली रखकर ऊपर बाकी बचा हुआ पाऊडर डालकर , नीचे आग जला दें । जब सारा पाऊडर राख हो जाए , तो उसके बाद भिलावा , कुचला , वत्सनाभ 50-50 ग्राम अधकुटा करके बीच में एक डली रखकर आग जलाएं जब यह  अधकुटा पाऊडर जल जाए तो डली निकाल कर , फिर इसमें मालकंगनी , अकरकरा , खुरासानी अजवायन 50-50 ग्राम अधकुटा सा करके पहले की तरह बीच में डली रखकर पाऊडर जल जाने के बाद डली निकाल लें।

इसी तरह सभी हिंगुल की डलीयाँ तैयार कर लें ।
जब सारी डलीयाँ इस तरह आप तैयार कर लें।  तो इन्हे सावधानी से साफ करके किसी अच्छे खरल में डालकर अच्छी तरह बारीक करें।
फिर इसमें से 10 ग्राम पाउडर अलग से निकाल कर , उसमें असली 2ग्राम केशर गुलाब के अर्क में बारीक पिसा हुआ डालकर , खूब खरल करके पूरी तरह सुखा दें ।
फिर इसकी एक बोतल अर्क जायफल , फिर अर्क जावित्री में थोड़ा-२ डालकर खूब खरल करें । जब सूख जाए तो इसको खुरासानी अजवायन के एक बोतल अर्क में थोड़ा-२ डालकर खरल करें ।

अब इस तैयार दवा में
हीरक भस्म अच्छी - 500 मिलीग्राम
स्वर्ण भस्म नं:1 - 500मिलीग्राम
मोती पिष्टी नं:1 - 2 ग्राम
प्रवाल पिष्टी नं:1 -2 ग्राम
अभ्रक भस्म सहस्त्रपुटी बाजीकरण-2 ग्राम
( सहस्रपुटी मतलब 1000 बार विशेष विधिपूर्वक भस्म की हुई। )
मिलाकर खूब खरल कर करके रख लें । आपकी दवा तैयार है।

आपका “हनीमून महायोग ” तैयार है।
सुबह - शाम दूध से एक - एक खुराक लें ।
दूध, जूस , फल का खूब प्रयोग करें ।

नोट :- जो मित्र आयुर्वेद की जानकारी नही रखते कृप्या वो इस दवा को खुद बनाने की कोशिश न करें ।
दवा बनाने में अगर असमर्थ है तो आप वटसऐप पर मेरे से संपर्क करके यह दवा कोरियर से देश-विदेश में कहीं भी मंगवा सकते है।

cost 20k for 40 days . 11k for 20days

सदैव आपका अपना
लेखक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमाँ , पंजाब
वटस ऐप 9915136138

यह योग मेरी जल्द‌आ रही किताब “ताकत के बादशाह” ( मेरे अनुभूत महायोग ) में से है। जिसमें ताकत के बेहतरीन महायोग आपको मिलेंगें। जो कि मेरी वर्षों की खोज का निचोड़ है। आप किताब अड़वांस में बुक करवा सकते है।

#हनीमून_महायोग #Honeymoon_Mahayog