Wednesday, April 30, 2025

Swarn Bhasma - Part -6

“स्वर्ण भस्म” -भाग -6

•कामिनी-विद्रावण रस स्पेशल•
( स्वर्ण भस्म, मोती , रजत युक्त )

शीघ्रपतन का काल है यह गोली~
मार्केट से आपको सिर्फ साधारण वाला कामिनी विंद्रावन रस ही मिलेगा, जो कि हमारे कामिनी विंद्रावन रस के मुकाबले न्यून गुण है।
 कामिनी विंद्रावन रस स्पेशल में हमने अपने अनुभव से मोती पिष्टी, प्रवाल पिष्टी, रजत भस्म ( चांदी भस्म) मिलाई है , जो कि पित्त को ठीक करती है। फार्मूले की तासीर को बेलेंस रखती है।
 इसे सभी तासीर वाले लें सकते हैं। हर मौसम में ले सकते हैं। इसमें चंदन भी डाला गया है जो कि बहुत ठंडी तासीर का होता है। बाकी चीजें गर्म तासीर की हैं । 
कुल मिलाकर यह नुस्खा न गर्मी करता है , न ठंड। हर कोई, गर्म ठंडी तासीर वाला बिना डर हर मौसम में इसे ले सकता है ‌। 
इसकी ताकत बढ़ाने के लिए हमने इसमें स्वर्ण भस्म भी मिलाया है। 

घटक -
अकरकरा, 
सोंठ, 
लौंग, 
केशर, 
पीपल, 
जायफल, 
जावित्री, 
प्रवाल पिष्टी,
चन्दन प्रत्येक 1-1ग्राम, 

शुद्ध सिंगरफ ¼ग्राम,
शुद्ध गन्धक ¼ग्राम,
रजत भस्म -¼ग्राम,
मोती पिष्टी -¼ग्राम,
स्वर्ण भस्म -¼ग्राम,
और शुद्ध अफीम “अकरकरा से चंदन” तक जितने घटक है , उनके बराबर मात्रा में लें।

1ग्राम = 1000mg 
¼ ग्राम = 250mg 

 प्रथम सिंगरफ, गन्धक और अफीम को एकत्र घोंट कर रखें। फिर शेष दवा को कूट, कपड़छन चूर्ण कर शीतल जल से घोंट कर मटर बराबर ( 250mg ) गोली बना, छाया में सुखा कर रख लें।

मात्रा और अनुपान-
1-1 गोली रात को सोने से एक घण्टा पूर्व दूध के साथ लें। 

गुण और उपयोग-
यह वीर्य को गाढ़ा कर स्तम्भन करता है एवं शुक्रवहा नाड़ियों को बलवान बनाता है। 

शीघ्रपतन वालों के लिये बहुत लाभदायक है, क्योंकि यह उत्तम वीर्य स्तम्भक है। 

अप्राकृतिक मैथुन अथवा हस्तमैथुन या स्वप्नदोष आदि के कारण उत्पन्न शीघ्रपतन की शिकायत तथा वीर्य के पतलेपन को मिटाने में यह रसायन बहुत श्रेष्ठ लाभदायक है ।

कामिनी विद्रावन रस शक्तिशाली जड़ी-बूटियों और खनिजों से तैयार किया गया है, जिनके बारे में पारंपरिक रूप से माना जाता है कि यह स्वस्थ शुक्राणु उत्पादन का समर्थन करते हैं और शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार करते हैं। यह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं।

मिलते हैं अगले लेख में.... 

✍🏻सदैव आपका अपना शुभचिंतक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
अमन आयुर्वेद - दसुआ -पंजाब 
Call & WhatsApp 099151 36138 

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Asthma

“स्वर्ण भस्म” भाग-8

‘श्वास-कास चिन्तामणि रस’ ( गोली ) स्वर्ण युक्त 

यह रसायन हृदय को बल देने वाला, हितकर और शक्ति बढ़ाने वाला है। फेफड़े पर इसका बहुत अच्छा प्रभाव होता है। संचित विकारों को निकालना और फेफड़े को सबल बनाना इसका प्रधान कार्य है। नये-पुराने सभी प्रकार के श्वास रोग में इससे बहुत लाभ होता है। दमे के जिन रोगियों को रात-दिन परे- शानी रहती है, उन्हें इसका सेवन अवश्य करना चाहिए ।

•घटक•
शुद्ध पारा 1तोला, शुद्ध गन्धक 2तोला, लौहभस्म 4तोला, अभ्रक भस्म 2तोला, स्वर्णमाक्षिक भस्म 1 तोला, मोती भस्म 3 माशे, सुवर्ण भस्म 1तोला, इन सबको एकत्र खरल कर, कटेरी के रस, अदरक के रस और बकरी के दूध तथा मुलेठी के क्वाथ और पान के रस से क्रमशः 7-7 भावना देकर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना, सुखा कर रख लें।

( -भैषज्य रत्नावली ग्रंथ में से)

मात्रा और अनुपान--1-1 गोली सुबह-शाम । 
श्वास रोग में बहेड़े की मींगी चूर्ण और मधु के साथ, कास-श्वास रोग में पीपल-चूर्ण और मधु के साथ, कास (खाँसी) में अदरक का रस और मधु के साथ, बलवृद्धि के लिये मलाई के साथ सेवन करें ।

गुण और उपयोग--यह रसायन हृदय को बल देने वाला, हितकर और शक्ति बढ़ाने वाला है। फेफड़े पर इसका बहुत अच्छा प्रभाव होता है। संचित विकारों को निकालना और फेफड़े को सबल बनाना इसका प्रधान कार्य है। नये-पुराने सभी प्रकार के श्वास रोग में इससे बहुत लाभ होता है। दमे के जिन रोगियों को रात-दिन परे- शानी रहती है, उन्हें इसका सेवन अवश्य करना चाहिए । कठिन और पुराने कास (खांसी) में इसका प्रयोग होता है। यह आँत, यकृत्, मूत्राशय तथा हृदय की क्रिया को ठीक करता एवं वीर्य को पुष्ट करता है। इसका अधिक प्रयोग श्वास रोग में ही किया जाता है और इससे उचित लाभ भी होता है। इन्जेक्शन आदि से हताश रोगी भी इससे शीघ्र अच्छे हो जाते हैं। बच्चों की कुकुर खाँसी और शोथ-रोग भी इससे ठीक हो जाते हैं। क्षय, पाण्डु, कामला, हलीमक, यकृत्, प्लीहा, मन्दाग्नि आदि रोगों में भी इसके सेवन से अत्युत्तम लाभ होता है। रस-रक्तादि धातुओं की पुष्टि करके शरीर को बलवान बनाता है।

स्वर्ण भस्म के सभी भाग भी पढ़िए, जो पहले लिख चुके हैं।‌Scrool करके आसानी से मिल जाएंगे , जरूर पढ़ें। 

मिलते है स्वर्ण भस्म युक्त किसी और ख़ास नुस्खे के साथ , अगले लेख में 🙏🏻

✍🏻 सदैव आपका अपना शुभचिंतक 
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा, 
अमन आयुर्वेद, 144205 , पंजाब 
Call & WhatsApp 099151 36138 

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Diabetes मधुमेह केसरी महायोग रसायन

“स्वर्ण भस्म -भाग -10 

“मधुमेह केसरी महायोग” 
“रसायन”

मधुमेह और मधुमेह के कारण कमजोरी, मर्दाना कमजोरी के लिए स्पैशल योग 

घटक:- 
स्वर्ण भस्म, मोती पिष्टी, चांदी भस्म, मकरध्वज
5-5 ग्राम ,
स्वर्ण बंग, लौह भस्म, अभ्रक भस्म ,त्रिबंग भस्म 
10-10ग्राम, 
स्वर्ण माक्षिक भस्म, शुद्ध शिलाजीत, शुद्ध कारसकर,त्रिकुटा
15-15 ग्राम,
गुड़मार बूटी extract,
विजयसार extract,
मामेजवा extract, 
निबोली
20-20ग्राम 

सब को खरल में डालकर 
गोखरु, दालचीनी, छोटी इलायची क्वाथ,घृतकुमारी के रस में 3-3 दिन ( कुल 12 दिन, रोज आठ घंटे , कुल 96 घंटे ) घोंटकर गोलियां बना, सुखा कर रख लेते हैं।  

गुण और उपयोग- यह रसायन प्रमेह, मधुमेह, मूत्रकृच्छ, अश्मरी और दाह आदि को नष्ट करता है।

 शुक्रस्राव को केवल 3 दिन में ही रोक देता है। इसके सेवन से मधुमेह में शर्करा की मात्रा कम होती है। इसके द्वारा अग्न्याशय की विकृतिजन्य पाचन-- क्रिया की न्यूनता से शारीरिक धातु-उपधातुओं की विकृति दूर हो जाती है और अग्न्याशय सबल होने पर शर्करा की अधिक उत्पत्ति नहीं होती है।

मधुमेह में होने वाले अधिक पेशाब, प्यास, मुँह सूखना, भूख अधिक न लगना, आँखों के सामने अंधेरा छा जाना, भ्रम होना, कानों में आवाज होना, बेचैनी, सिर-दर्द आदि लक्षण होने पर यह बहुत फायदा करता है। 

मधुमेह में वात प्रकोप के कारण सर्वांग में दर्द, रक्तवाहिनी नाड़ियों में वात-प्रकोप होना, कलाय खंज (लंगड़ापन), चलने में पाँव काँपना, शरीर में सन्धियों की शिथिलता तथा उनमें अधिक दर्द होना, इन लक्षणों में इस दवा के उपयोग से बहुत फायदा होता है।

पुराने मुककृच्छ रोग में इसका उपयोग किया जाता है। इसमें मूत्र का वेग तो मालूम पड़ता है, किन्तु मूत्राशय से लेकर मूत्रनली के बीच किसी चीज की रुकावट हो जाने से पेशाब खुलकर न होकर कठिनता से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में होता है। कठिनता से पेशाब होने के कारण ही इस रोग का नाम "मूतकृच्छ्र" पड़ा है। 

 प्रमेह अथवा मधुमेह में  विशेष गुणकारी है, इसके सेवन से इन्शुलीन जैसा प्रभाव होता है।

यह दवा 5 मरीजों का कोर्स है। यह नुस्खा में 10महीने की मात्रा के हिसाब से बताया गया है। हम जरुरत अनुसार ज्यादा भी तैयार करते हैं। 
दो महीने का एक मरीज के लिए । 
1 महीने का 15995/- खर्च , 2 महीने का 30595/-
रुपए खर्च है। इस नुस्खे में स्वर्ण भस्म 1 लाख की 5 ग्राम है। मोती , मकरध्वज, चांदी भस्म, अभ्रक भस्म सहस्त्र भी महंगे योग हैं। इसे बनाने की labour अलग है। पाठक इस बात का विशेष ध्यान रखें।‌

जरुरतमंद हमसे देश विदेश में मंगवाकर लाभ ले सकते हैं। 

मिलता हुं अगले लेख में ... तब तक आप सभी को 🙏🏻

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